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जंगल में आग लगी और वीर बालकों ने दिखाई तत्परता

वन अमले के साथ मिलकर बुझाई आग

10 मार्च 2026 0 व्यू

जगदलपुर। बस्तर के जंगलों से वीरता और पर्यावरण प्रेम की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने बड़े-बड़ों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। करपावंड रेंज के अंतर्गत मोझांगांव के जंगलों में जब शनिवार को भीषण आग की लपटें उठीं, तो उन्हें बुझाने के लिए सरकारी अमले के साथ दो ऐसे जांबाज भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गए, जिनकी उम्र अभी खेल-कूद की है।

गांव के रहने वाले दो बच्चों (दिलीप और तुलसी), जिनकी उम्र करीब 10 वर्ष बताई जा रही है, जंगल को जलता देख केवल साहस का परिचय ही नहीं दिया, बल्कि अपनी सूझबूझ से वन विभाग के कर्मचारियों की भी मदद की।

जैसे ही इन बच्चों ने जंगल में आग की लपटें देखीं, उन्हें अपने भविष्य का आधार जलता हुआ महसूस हुआ। बिना किसी हिचकिचाहट या सरकारी आदेश का इंतजार किए, ये दोनों बच्चे स्वेच्छा से आगे बढ़कर आग बुझाने के काम में जुट गए। बच्चों के इस निस्वार्थ और साहसिक कदम ने मौके पर मौजूद वन विभाग के कर्मचारियों में भी नया उत्साह भर दिया। नन्हें हाथों को आग से लड़ते देख कर्मचारियों का मनोबल इतना बढ़ा कि सभी ने मिलकर कम समय में आग पर पूरी तरह काबू पा लिया।

इन मासूमों के इस जज्बे ने यह साबित कर दिया कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती।

इस अद्भुत साहस पर प्रतिक्रिया देते हुए बस्तर के वनमंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने बच्चों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इन बच्चों ने जंगल की रक्षा के प्रति जो समर्पण दिखाया है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। विभाग ने इस साहस का सम्मान करने का निर्णय लिया है और जल्द ही इन बच्चों को सम्मानित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि हमारा भविष्य हैं। विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि अपनी प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए जागरूक बनें। विभाग ने चेतावनी दी है कि जंगलों में आग लगाना भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत गंभीर और दंडनीय अपराध है।

अधिकारियों ने बस्तरवासियों से अनुरोध किया है कि यदि कहीं भी जंगल में आग की घटना दिखाई दे, तो तत्काल फायर कंट्रोल रूम के टोल फ्री नंबर 1800 233 7000 पर इसकी सूचना दें, ताकि समय रहते प्रकृति को विनाश से बचाया जा सके।