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ड्रग्स सेवन करने वाले अपराधी नहीं पीड़ित हैं: सुप्रीम कोर्ट

नशे के शिकार को जेल भेजना समाधान नहीं

14 अक्तू॰ 2026 1 व्यू
ड्रग्स सेवन करने वाले अपराधी नहीं पीड़ित हैं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मादक पदार्थों (ड्रग्स) के सेवन और इसकी तस्करी से जुड़े मामलों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि ड्रग्स का इस्तेमाल करने वाले लोग वास्तव में इस अवैध नेटवर्क के पीड़ित हैं, न कि केवल अपराधी। शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि मुकदमा चलाने और जेल भेजने से ऐसे व्यक्ति जेल के माहौल में और गंभीर अपराधियों के संपर्क में आकर ड्रग्स की सप्लाई चेन में गहराई से धकेले जा सकते हैं।

 

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने एक महिला आरोपी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों और कानून प्रवर्तन का मुख्य ध्यान ड्रग्स की उपलब्धता को रोकने और इसकी आपूर्ति (सप्लाई चेन) को ध्वस्त करने पर होना चाहिए, न कि केवल नशे के शिकार लोगों को सजा देने पर।

 

यह मामला एक कॉलेज के पास से गांजा खरीदने के आरोप में गिरफ्तार की गई महिला से जुड़ा था। पुलिस के अनुसार, महिला ने दो संदिग्ध विक्रेताओं से गांजे से भरा पैकेट लेकर अपने बैग में रखा था। हालांकि, जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों के बयानों में ही यह बात सामने आई कि महिला या उसके बैग से कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ था। पूरा मामला सह-आरोपियों के बयान और महिला के कथित कबूलनामे पर आधारित था।

 

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां:

 

सबूत का अभाव: पीठ ने कानूनी सिद्धांत दोहराते हुए कहा कि केवल कबूलनामे के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जब आरोपी से कोई जब्ती नहीं हुई है, तो मुकदमा जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।

 

सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण आवश्यक: अदालत ने कहा कि जो लोग सप्लाई चेन के आखिरी छोर पर हैं, वे पीड़ित हैं। विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहने से वे जेल में बने संबंधों के कारण खुद ड्रग्स बेचने वाले नेटवर्क का हिस्सा बन सकते हैं।

 

मुख्य लक्ष्य पर ध्यान: नशे की बुराई को खत्म करने के लिए तस्करों और मुख्य गिरोहों पर नकेल कसना जरूरी है।

 

सर्वोच्च अदालत ने महिला की अपील को स्वीकार करते हुए उसके खिलाफ चल रही सभी आपराधिक कार्यवाहियों को खारिज कर दिया।