नई दिल्ली। देश में दवाओं और मेडिकल उपकरणों की आसमान छूती कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ा रुख अपनाते हुए व्यापक समीक्षा करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने सवाल उठाया कि जब सरकार कैंसर की दवाओं के ट्रेड मार्जिन को सीमित कर सकती है, तो फिर यही व्यवस्था अन्य सभी जीवनरक्षक दवाओं और मेडिकल डिवाइस पर लागू क्यों नहीं की जा सकती। अदालत ने अस्पताल और फार्मा कंपनियों द्वारा लागत से कई गुना अधिक वसूली पर गहरी चिंता जताई।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार के उस जवाब को नाकाफी बताया, जिसमें कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को 30 प्रतिशत पर कैप करने से मरीजों को सालाना 2,500 करोड़ रुपये की बचत का हवाला दिया गया था। सुनवाई के दौरान पीठ ने उदाहरण देते हुए कहा कि बाजार में केवल 11 रुपये की लागत वाली सलाइन ड्रिप मरीजों को 270 रुपये में बेची जा रही है। अदालत ने टिप्पणी की कि उत्पादन, परिवहन और अनुसंधान की लागत एमआरपी में शामिल होने के बावजूद कंपनियों को वास्तविक लागत से 400 गुना तक ज्यादा दाम वसूलने की इजाजत देना तर्कसंगत नहीं है। पीठ ने भारत में बने कार्डियक स्टेंट और एंटीबायोटिक दवाओं के भारी अंतर का भी जिक्र किया।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मौजूदा मूल्य नियंत्रण प्रणाली का बचाव किया। सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि एक सीमा से अधिक मार्जिन कम करने पर दवाओं की पहुंच दूर-दराज के इलाकों में प्रभावित हो सकती है। सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची (NLEM) 2022 के तहत 388 दवाओं और 900 से अधिक फॉर्मूलेशन को शामिल किया गया है, जिनकी अधिकतम सीमा (सीलिंग प्राइस) तय की जाती है। गैर-अनुसूचित दवाओं के मामले में भी कंपनियां साल भर में 10 प्रतिशत से अधिक एमआरपी नहीं बढ़ा सकती हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि नियंत्रित दवाएं मरीजों तक नहीं पहुंच पा रही हैं, तो यह सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसका उद्देश्य सरकार के हाथों को मजबूत करना है ताकि आम जनता को महंगी दवाओं के बोझ से राहत मिल सके। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को दवाओं और मेडिकल उपकरणों की कीमतों को नियंत्रित करने तथा ट्रेड मार्जिन को सीमित करने की ठोस रूपरेखा तैयार करने के लिए समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर तय की है।