New Delhi | किताब
हिंदी साहित्य की कुछ ऐसी कृतियां हैं जो कालजयी बन गई हैं जो सालों से पाठकों पर छाई हुईं हैं। बात कर रहे हैं हिंदी साहित्य की ऐसी ही क्लासिक्स किताबों की जिन्हें अपने जीवन में एक बार पढ़ा ही जाना चाहिए। आइए जानते हैं उन 10 किताबों के बारे में।

गोदान मुंशी प्रेमचंद

हिंदी साहित्य प्रेमचंद के नाम के बगैर अधूरा है। वैसे तो प्रेमचंद की कई कालजयी कृतियां हैं, गोदान उपन्यास उनकी सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में से है। यह हिंदी में 1936 में प्रकाशित हुआ और अंग्रेजी में इसका अनुवाद 1987 में हुआ। ब्रिटिश शासन के अधीन वाले भारत के समाज, परिवार और परिवेश के लिए यह उपन्यास पढ़ा जाना चाहिए।

मैला आंचल फणीश्वर नाथ रेणु

हिन्दी साहित्य में फणीश्वर नाथ रेणु और उनके उपन्यास मैला आंचल का नाम कालजयी हैं। यह उनकी सबसे लोकप्रिय किताब है। इसमें एक ऐसे डॉक्टर की कहानी है, जो पढ़ाई पूरी कर गांव में प्रैक्टिस करने लगता है। मैला आंचल उपन्यास पर दूरदर्शन पर एक टीवी सीरियल भी प्रसारित हो चुका है। मैला आचंल और इसकी भाषा आपको असली हिंदुस्तान में लेकर जाएंगे।

तमस भीष्म साहनी

सांप्रदायिक दंगों की पृष्ठभूमि पर लिखी किताबों में भीष्म साहनी की तमस सबसे अच्छा दस्तावेज है। इसमें देश के विभाजन से पहले के परिदृश्य का भी उल्लेख मिलेगा।

आषाढ़ का एक दिन मोहन राकेश

आषाढ़ का एक दिन एक नाटक है, जिसमें कालिदास और मल्लिका के प्रेम को दर्ज किया गया है। नाटक में प्रेम कहानियों में दिलचस्पी रखने वाले पाठकों को यह किताब जरूर पढ़ना चाहिए।

राग दरबारी श्रीलाल शुक्ल

समाज और राजनीति पर अब तक का सबसे अच्छा सटायर है श्रीलाल शुक्ल का उपन्यास राग दरबारी। इस किताब में व्यवस्था, सरकार और व्यक्ति विशेष के स्वभाव आदि पर व्यंग्य है। श्री लाल शुक्ल को साहित्य अकादमी से सम्मानित किया गया है।
गुनाहों का देवता धर्मवीर भारती
हिंदी किताबें पढ़ने वाले ज्यादातर पाठक अपनी पठन यात्रा धर्मवीर भारती के इसी उपन्यास से शुरू करते हैं। जिसने भी यह उपन्यास पढ़ा है वो इसके नायक और नायिका चंदर और सुधा को कभी नहीं भूल सकता। एक नाकाम मुहब्बत की ऐसी कहानी आपने कभी नहीं पढ़ी होगी।
कितने पाकिस्तान कमलेश्वर
इतिहास में हुई त्रासदी और विभाजन पर कोई किताब पढ़नी हो तो कमलेश्वर की 'कितने पाकिस्तान' पढ़ी जाना चाहिए। इस उपन्यास को साल 2003 में साहित्य एकेडमी अवॉर्ड भी मिला था।
मृत्युंजय शिवाजी सावंत
महादानी कर्ण को जानने और समझने के लिए शिवाजी सावंत के उपन्यास ‘मृत्युंजय’ से बेहतर कुछ नहीं हो सकता। यह एक ऐसी किताब है जिसे पढने के बाद हम कई दिनों तक कर्ण की दुनिया और उनके जीवन में प्रवेश कर जाते हैं। भाषा, भाव और धर्म संकट का ऐसा विवरण कि इसे हम आज एक ग्रंथ ही मानते हैं।