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शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुजनों को लिखा आत्मीय पत्र, अपने छात्र जीवन के संघर्षों को किया याद

05 सित॰ 2026 26 व्यू
शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुजनों को लिखा आत्मीय पत्र, अपने छात्र जीवन के संघर्षों को किया याद

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के गुरुजनों के नाम आत्मीय पत्र लिखकर सादर नमन किया है। पत्र में उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों, संघर्षों और शिक्षा में आए बदलाव का भावपूर्ण उल्लेख किया है।मुख्यमंत्री ने लिखा कि आज जब वे बच्चों के भविष्य से जुड़े निर्णय लेते हैं, तो अपने बचपन के दिन और अधिक याद आते हैं। जीवन कितना भी आगे बढ़ जाए, शिक्षकों के प्रति आदर कम नहीं होता।बगिया के छोटे से स्कूल से शुरू हुआ सफरमुख्यमंत्री ने बताया कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गांव के किसान परिवार में हुआ।

10 वर्ष की उम्र में, चौथी कक्षा में पढ़ते समय पिता का साया उठ गया। गांव में पांचवीं तक पढ़ने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए कुनकुरी के लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक छोटे कमरे में रहकर पढ़ाई की। पारिवारिक परिस्थितियों से आगे पढ़ाई जारी न रख सके और खेती संभाली।उन्होंने कहा कि उस दौर में स्कूल दूर होते थे, संसाधनों का अभाव था और आर्थिक कठिनाइयां सपनों में बाधा बनती थीं।स्लेट-तख्ती से स्मार्ट क्लास तकमुख्यमंत्री ने कहा कि जिस पीढ़ी ने स्लेट, तख्ती और चॉक से पढ़ाई शुरू की थी, आज उसी छत्तीसगढ़ के बच्चे स्मार्ट क्लास में पढ़ रहे हैं।

दूरस्थ अंचलों में भी बेहतर विद्यालय और डिजिटल संसाधन पहुंच रहे हैं।उन्होंने कहा कि तकनीक जानकारी दे सकती है, किताबें ज्ञान दे सकती हैं, लेकिन बच्चे में आत्मविश्वास जगाने, संस्कार गढ़ने और अच्छा मनुष्य बनाने का सामर्थ्य एक संवेदनशील शिक्षक में ही होता है।मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे हर बच्चे में छिपी संभावना को पहचानें और अभाव या संकोच से पीछे छूट रहे बच्चों का हाथ थामें।उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप मातृभाषा में शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल शिक्षा पर काम हो रहा है। बस्तर जैसे क्षेत्रों में भी जहां वर्षों स्कूल बंद रहे, वहां फिर घंटियां सुनाई दे रही हैं।अंत में उन्होंने कहा कि हम ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना चाहते हैं, जहां परिस्थितियां किसी बच्चे के सपनों की सीमा तय न करें।