रायपुर। शहर में मकान के नाम पर चल रहे कारोबार का हिसाब अब नगर निगम जुटाएगा। निगम के रिकॉर्ड में आवासीय दर्ज हजारों मकानों में शटर लगाकर दुकान, कोचिंग सेंटर, गैरेज और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें हैं। ऐसे 10 हजार से अधिक मकान चिन्हित किए गए हैं।
निगम को हो रहा राजस्व का नुकसान
शहर के अंदरूनी और आउटर इलाकों में कई जगह नीचे दुकान और ऊपर मकान का कारोबार चल रहा है। आवासीय भवन के रूप में दर्ज संपत्ति के एक हिस्से में दुकान या अन्य व्यवसाय संचालित होने से संबंधित संपत्तियों पर व्यावसायिक दर से संपत्ति कर नहीं लग पा रहा है। इससे निगम के राजस्व को हर साल करीब 5 करोड़ का नुकसान हो रहा है।
मोबाइल टावर भी जांच के दायरे में
मकानों की छतों पर लगे मोबाइल टावरों की भी जानकारी जुटाई जाएगी। निगम यह देखेगा कि संबंधित संपत्ति पर मोबाइल टावर लगा है या नहीं और उसके व्यावसायिक उपयोग के अनुसार संपत्ति कर जमा किया जा रहा है या नहीं। व्यावसायिक उपयोग मिलने पर नियमानुसार संपत्ति कर की श्रेणी में बदलाव किया जाएगा।
दुकानों से सड़कों पर बढ़ रहा दबाव
रिहायशी इलाकों में बिना पार्किंग के दुकान और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने से सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ रहा है। ग्राहक दुकानों के सामने वाहन खड़े कर देते हैं। इससे संकरी गलियों और मोहल्लों में आने-जाने की जगह कम हो जाती है। कई जगह आड़ी-तिरछी पार्किंग के कारण रहवासियों और राहगीरों को परेशानी होती है।
नियमानुसार वसूलेंगे कर
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार आवासीय दर्ज संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। चिन्हित संपत्तियों की जांच कर उनका वास्तविक उपयोग देखा जाएगा और व्यावसायिक उपयोग मिलने पर नियमानुसार संपत्ति कर वसूला जाएगा।