वाशिंगटन। ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में अमेरिका को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिकी संसद के निष्पक्ष शोध संस्थान 'कांग्रेसनल बजट ऑफिस' (सीबीओ) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध में अब तक कम से कम 81 अमेरिकी सैन्य विमान क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुके हैं।
सीबीओ की रिपोर्ट में बताया गया है कि अगस्त की शुरुआत तक हुए इन नुकसानों की कुल लागत $1.9 अरब से $3.3 अरब के बीच रही है। नष्ट हुए सैन्य उपकरणों में 12 एफ-15ई स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान, एक उन्नत एफ-35ए लाइटनिंग II जेट और 7 केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर हवाई ईंधन भरने वाले विमान शामिल हैं। इसके अलावा 81 विमानों में 45 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध अब अपने आठवें महीने में प्रवेश कर चुका है और संघर्ष विराम की दूर-दूर तक कोई उम्मीद नहीं दिख रही है, जिससे अमेरिकी रक्षा तंत्र पर वित्तीय बोझ लगातार बढ़ रहा है। सीबीओ के आंकड़ों के अनुसार, इस युद्ध की कुल लागत $38 अरब के पार पहुंच चुकी है और हर अतिरिक्त महीने में $2 से $3 अरब का खर्च आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष ने आधुनिक युद्ध की तस्वीर बदल दी है। कम लागत वाले ड्रोन ने बड़ी और शक्तिशाली सेनाओं के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। रक्षा विशेषज्ञ हरलान उलमन का कहना है कि यह दर्शाता है कि सीमित संसाधनों वाला देश भी ड्रोन तकनीक से दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। ब्रिटेन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास भी संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों के चलते विमानों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा है।
इस बीच युद्ध के बढ़ते खर्च ने अमेरिकी संसद में राजनीतिक बहस तेज कर दी है। ट्रंप प्रशासन द्वारा वित्त वर्ष 2027 के लिए मांगे गए रिकॉर्ड $1.5 ट्रिलियन के रक्षा बजट पर डेमोक्रेट सांसदों ने कड़ा ऐतराज जताया है। सांसदों का तर्क है कि इस युद्ध का बोझ बजट के साथ-साथ ईंधन और खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के रूप में आम अमेरिकी जनता को भी भुगतना पड़ रहा है।