जांजगीर। चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के तहत जांजगीर की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश जयदीप गर्ग ने विनायक होम्स रियल स्टेट के संचालक जितेंद्र बिषे को निवेशकों से ठगी के मामले में 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 1 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। आरोपी ने निवेशकों को 6.5 साल में रकम दोगुनी करने का लालच देकर करोड़ों का फर्जीवाड़ा किया था।
क्या था पूरा मामला
लोक अभियोजक संदीप सिंह बनाफर के अनुसार, वर्ष 2013 में आरोपी ने पीड़ित रामकिशुन यादव को कंपनी की आकर्षक योजना बताई। निवेशकों से कहा गया कि साढ़े छह साल में जमा राशि दोगुनी हो जाएगी। इसी भरोसे में पीड़ित ने 2013 से 2015 के बीच कंपनी में करीब 3.03 लाख रुपये जमा किए।
मियाद पूरी होने पर जब पीड़ित कंपनी कार्यालय पहुंचा तो ताला लगा मिला। पता चला कि संचालक निवेशकों की रकम लेकर फरार हो गए। इसके बाद थाना चांपा में मामला दर्ज हुआ।
किन धाराओं में हुई सजा
कोर्ट ने आरोपी को कई धाराओं में दोषी माना और अलग-अलग सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी, इसलिए प्रभावी सजा 10 साल की होगी।
- BNS धारा 420: 7 वर्ष सश्रम कारावास + 1 लाख जुर्माना
- इनामी चिट एवं धन परिचालन स्कीम अधिनियम धारा 4: 3 वर्ष + 5,000 जुर्माना
- धारा 5: 2 वर्ष + 3,000 जुर्माना
- छत्तीसगढ़ निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम धारा 10: 10 वर्ष + 1 लाख अर्थदंड
10 गवाहों के बाद आया फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 10 गवाहों के बयान कराए। अदालत ने सभी साक्ष्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद माना कि आरोपी ने विश्वास जीतकर रकम जमा कराई और बाद में पैसा वापस नहीं किया। न्यायाधीश ने इसे सुनियोजित आर्थिक अपराध मानते हुए कड़ी सजा सुनाई।