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चीन: नैनो-आयरन थेरेपी से 84% एडवांस्ड कैंसर मरीजों में थमा कैंसर का बढ़ना

फेज-1 ट्रायल में बड़ी सफलता

18 अक्तू॰ 2026 2 व्यू
चीन: नैनो-आयरन थेरेपी से 84% एडवांस्ड कैंसर मरीजों में थमा कैंसर का बढ़ना

नई दिल्ली। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर है कि एडवांस्ड और मेटास्टैटिक कैंसर से जूझ रहे उन मरीजों के लिए एक नई उम्मीद सामने आई है, जिन पर परंपरागत इलाज असर करना बंद कर चुके थे। चीनी डॉक्टरों ने लोहे के तत्व से तैयार की गई एक विशेष दवा के माध्यम से कैंसर ट्यूमर के विकास को रोकने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

 

इस नए इलाज का विचार औद्योगिक अपशिष्ट या गंदे पानी के उपचार की प्रक्रिया से आया है। जिस तरह फैक्ट्रियों के गंदे पानी में लोहे और हाइड्रोजन पेरोक्साइड के रासायनिक मेल से खतरनाक जहरीले अणुओं को नष्ट किया जाता है, ठीक उसी सिद्धांत का इस्तेमाल मानव शरीर के भीतर कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए किया गया।

 

वैज्ञानिकों ने लोहे को एक खास नैनो-कार्बन इंजेक्शन के साथ मिलाकर एक नई दवा 'सीएनएसआई-एफई' (CNSI-Fe) तैयार की, जिसमें मुख्य रूप से फेरस आयरन का उपयोग किया गया है। चीन के तीन प्रमुख अस्पतालों में 19 एडवांस्ड कैंसर रोगियों पर किए गए इस फेज-1 क्लिनिकल ट्रायल के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं।

 

अध्ययन में शामिल 84.2 प्रतिशत (16 मरीजों) में कैंसर का बढ़ना पूरी तरह थम गया, जबकि दो मरीजों के ट्यूमर का आकार काफी घट गया।

 

प्रसिद्ध पीयर-रिव्यू जर्नल 'सिग्नल ट्रांसडक्शन एंड टारगेटेड थेरेपी' में प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार, यह थेरेपी सुरक्षा और प्रभावशीलता दोनों मोर्चों पर खरी उतरी है। इस अध्ययन के प्रमुख अन्वेषक प्रोफेसर वांग योंगशेंग ने बताया कि लोहे पर आधारित यह दवा ट्यूमर वाली जगह पर फेरोप्टोसिस प्रक्रिया को सक्रिय कर कैंसर कोशिकाओं को लक्षित तरीके से नष्ट करती है।

 

इस अध्ययन की खास बात यह है कि परीक्षण में शामिल सभी 16 मरीज कैंसर के चौथे चरण यानी एंड-स्टेज मेटास्टैटिक ट्यूमर से पीड़ित थे। ये सभी मरीज पहले से ही कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी कम से कम दो लाइनों का इलाज करा चुके थे, लेकिन उन्हें कोई फायदा नहीं मिल रहा था।

 

जैविक रूप से यह दवा सामान्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना केवल कैंसरग्रस्त कोशिकाओं पर हमला करती है। ट्रायल के दौरान मरीजों में किसी भी तरह की गंभीर हेमेटोलॉजिकल, लिवर या किडनी से जुड़ी विषाक्तता नहीं देखी गई। अब इस थेरेपी की सफलता को देखते हुए चीन के 10 शीर्ष अस्पतालों में 52 मरीजों पर दूसरे चरण (फेज-2) का बड़ा ट्रायल शुरू कर दिया गया है।