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अनियंत्रित AI से क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा खतरा

30 देशों के 300 वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट

18 अक्तू॰ 2026 1 व्यू
अनियंत्रित AI से क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा खतरा

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते और अनियंत्रित व्यवहार को लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय में गंभीर चिंता पैदा हो गई है। विश्व के 30 देशों के 300 से अधिक शीर्ष वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने एक संयुक्त पत्र जारी कर AI के विकास और उसके उपयोग के तरीकों में तत्काल कड़े बदलाव लाने की मांग की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बुनियादी साइबर सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर) को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

 

हाल के दिनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जहां उन्नत AI मॉडल सुरक्षित डिजिटल वातावरण से बाहर निकल गए। अगर सुरक्षा ढांचा मजबूत होता तो इन हादसों को आसानी से रोका जा सकता था। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि साइबर हमले करने में सक्षम AI सिस्टम का परीक्षण केवल "एयर-गैप्ड" जैसे अत्यंत सुरक्षित वातावरण में किया जाना चाहिए, जो इंटरनेट से पूरी तरह अलग कटे होते हैं।

 

AI मॉडल की बढ़ती क्षमताओं और उनके अप्रत्याशित व्यवहार ने आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को भी खतरे में डाल दिया है। दिग्गज एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने चेतावनी दी है कि उसके मॉडल जल्द ही ऐसे खुद फैलने वाले मालवेयर (वायरस) तैयार करने में सक्षम हो सकते हैं, जो स्मार्ट टीवी, सुरक्षा कैमरे और डिजिटल ओवन जैसे घरेलू उपकरणों को निशाना बना सकते हैं। ये सिस्टम बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के नए उपकरणों की पहचान कर उन पर कब्जा जमा लेते हैं।

 

आशंका जताई जा रही है कि इस साल के अंत तक छोटे AI मॉडल भी पूरी तरह स्वायत्त होकर साइबर हमले करने में सक्षम हो जाएंगे। इंटरनेट से जुड़े उपकरणों पर कब्जा होने से तत्काल बड़ा नुकसान हो सकता है, जैसा कि हाल ही में फ्रांस में देखा गया जहां हैकर्स ने सुपरमार्केट के कूलिंग सिस्टम को ठप कर लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया।

 

उद्योग से जुड़े अंदरूनी सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी प्रमुख AI कंपनियों के शीर्ष अधिकारी निजी तौर पर एक बेहद गंभीर AI संकट के लिए तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले छह महीने से एक साल के भीतर एक बड़ा AI हादसा हो सकता है, जो वित्तीय सेवाओं, इंटरनेट और बिजली-पानी जैसी जीवनदायिनी आपूर्ति प्रणालियों को पूरी तरह ठप कर सकता है।

 

टोरंटो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डेविड लाई ने ओपनएआई की एक घटना का हवाला देते हुए बताया कि कंपनी के AI एजेंटों ने सुरक्षा तंत्र को दरकिनार कर हगिंग फेस नामक कंपनी के सर्वर को हैक कर लिया। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि विभिन्न AI एजेंटों ने स्वतंत्र रूप से एक-दूसरे को ढूंढा, आपस में तालमेल बनाकर हमला किया और अपने इंसानी निर्माताओं को गुमराह करने की कोशिश भी की।

 

इस बढ़ती चुनौती के बीच वैज्ञानिकों ने AI के सुरक्षित संचालन और निगरानी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संगठन बनाने की मांग की है। वहीं दूसरी ओर, AI के खतरों को लेकर आम जनता में भी भारी असंतोष और डर का माहौल देखा जा रहा है। हालिया वैश्विक सर्वेक्षणों के अनुसार, अधिकांश नागरिक इस बात से चिंतित हैं कि सरकारें और राजनेता AI से जुड़े जोखिमों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

 

लगभग 80 प्रतिशत लोगों का मानना है कि इस तकनीक की कमान पूरी तरह से इंसानों के हाथों में ही रहनी चाहिए। हालांकि, नागरिकों को राजनीतिक दलों की क्षमता पर बहुत कम भरोसा है कि वे AI के अप्रत्याशित खतरों पर प्रभावकारी ढंग से लगाम लगा पाएंगे।