अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित श्री महावीर हॉस्पिटल पर गंभीर चिकित्सीय लापरवाही और आर्थिक अनियमितता के आरोपों के चलते बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की गई है। जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए अस्पताल के लाइसेंस और पंजीयन को आगामी 17 अक्टूबर से 16 नवंबर 2026 तक पूरे एक महीने के लिए निलंबित कर दिया है।
इसके साथ ही, सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में धांधली को देखते हुए कलेक्टर अजीत वसंत ने आयुष्मान भारत योजना और डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत अस्पताल की संबद्धता को तीन माह के लिए रद्द करने की सिफारिश राज्य सरकार को भेजी है।
यह समूचा मामला एक सड़क दुर्घटना में घायल हुए 24 वर्षीय युवा आशुतोष दास के इलाज में बरती गई घोर लापरवाही से जुड़ा है। दुर्घटना के बाद आशुतोष को अंबिकापुर के श्री महावीर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी ब्रेन सर्जरी की गई। परिजनों का आरोप है कि उचित देखभाल और सही इलाज न मिलने के कारण मरीज के फेफड़े पूरी तरह खराब हो गए।
हालत नाजुक होने पर उसे रायपुर के उच्च संस्थान के लिए रेफर किया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के उपरांत मृण्मयी पांडेय ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
प्राप्त शिकायत के आधार पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के नेतृत्व में एक जांच दल का गठन किया गया। जांच टीम ने जब अस्पताल के दस्तावेजों और सुविधाओं का निरीक्षण किया तो कई चौंकाने वाली अनियमितताएं उजागर हुईं।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जिस डॉक्टर ने मरीज का दिमागी ऑपरेशन किया था, उनका नाम अस्पताल के आधिकारिक पंजीयन में दर्ज ही नहीं था।
इतना ही नहीं, नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के विपरीत अस्पताल के रिकॉर्ड में न्यूरो सर्जरी जैसी संवेदनशील सुविधा का कोई उल्लेख तक नहीं था। स्वास्थ्य विभाग को बिना पूर्व सूचना दिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं लेने और मरीज के रेफरल प्रक्रिया में तय नियमों की अनदेखी करने का दोषी भी पाया गया।
इलाज में लापरवाही के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीज के परिजनों का आर्थिक शोषण करने की बात भी प्रशासनिक जांच में पूरी तरह साबित हुई है।
जांच के दौरान पता चला कि अस्पताल प्रशासन ने आशुतोष के इलाज के नाम पर आयुष्मान योजना के अंतर्गत उपलब्ध संपूर्ण स्वीकृत राशि पहले ही बुक कर ली थी। इसके बावजूद परिजनों से दबाव बनाकर ₹87,300 अतिरिक्त वसूल लिए गए।
कलेक्टर ने नियमों के इस खुले उल्लंघन को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रबंधन को परिजनों से वसूली गई यह पूरी राशि तत्काल वापस लौटाने के निर्देश जारी किए हैं।