सारंगढ़। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाइगढ़ जिले में स्थित गोमर्डा वन्यजीव अभयारण्य में पांच दशकों का लंबा इंतजार खत्म होने जा रहा है। शिकार, अतिक्रमण और आवास स्थल के नुकसान के कारण 1970 के दशक में इस क्षेत्र से पूरी तरह विलुप्त हो चुके काले हिरणों (कृष्णमृग) की गोमर्डा में एक बार फिर वापसी हो रही है।
राज्य के बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य से लगभग 50 काले हिरणों को चरणबद्ध तरीके से गोमर्डा स्थानांतरित किया जाएगा।
गोमर्डा और बारनवापारा अभयारण्य एक ही प्राकृतिक भू-भाग का हिस्सा हैं और इनके बीच महज 70 किलोमीटर की दूरी है। बेहतर घास के मैदानों और जल स्रोतों की उपलब्धता के कारण गोमर्डा को इन जीवों के अनुकूल माना जा रहा है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में शामिल यह दुर्लभ प्रजाति बारनवापारा में सफल पुनरुत्थान के बाद अब गोमर्डा के जंगलों की रौनक़ बढ़ाएगी।
इस पुनर्वास योजना की शुरुआत वर्ष 2017-18 में हुई थी, जब दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान और बिलासपुर के कानन पेंडारी से 77 काले हिरणों को बारनवापारा लाया गया था।
अनुकूल वातावरण और संरक्षण प्रयासों के चलते आज बारनवापारा में इनकी संख्या बढ़कर 150 से अधिक हो चुकी है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के इस सफल संरक्षण प्रयास की सराहना की थी। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से न केवल काले हिरणों की प्रजाति का पुनरुत्थान होगा, बल्कि क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।