raipur | राष्ट्रीय
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प्रकृति निबंध ![]() test sample of photos in the form of numerics प्रकृति के विषय को समझने के लिये इस पर आसान भाषण और निबंध दिये जा रहे है। इससे हमारे केजी से लेकर 10 तक के बच्चों और विद्याथर्यीं की शिक्षा में नई रचनात्मकता का प्रवेश होगा। प्रकृति हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसके बारे में हमें अपने बच्चों को बताना चाहिये। तो, चलिये निबंध लेखन और भाषण व्याख्यान के द्वारा अपने बच्चों को कुदरत के करीब लाते है। ![]() test sample of photos in the form of numerics हम सबसे सुंदर ग्रह पर निवास करते है, जी हाँ धरती, जो हरियाली से युक्त बेहद सुंदर और आकर्षक है। कुदरत हमारी सबसे अच्छी साथी होती है जो हमें धरती पर जीवन जीने के लिये सभी जरुरी संसाधन उपलब्ध कराती है। प्रकृति हमें पीने को पानी, सांस लेने को शुद्ध हवा, पेट के लिये भोजन, रहने के लिये जमीन, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे आदि हमारी बेहतरी के लिये उपलब्ध कराती है। हमें बिना इसके पारिस्थितिक संतुलन को बिगाड़े इसका आनन्द लेना चाहिये। हमें अपने प्राकृतिक परिवेश का ध्यान रखना चाहिये, स्थिर बनाना चाहिये, साफ रखना चाहिये और विनाश से बचाना चाहिये जिससे हम अपनी प्रकृति का हमेशा आनन्द ले सकें। ये हम इंसानों को ईश्वर के द्वारा दिया गया सबसे खूबसूरत उपहार है जिसे नुकसान पहुँचाने के बजाय उसका आनन्द लेना चाहिये। ![]() test sample of photos in the form of numerics
हमारे सबसे आस-पास सुंदर और आकर्षक प्रकृति है जो हमें खुश रखती है और स्वस्थ जीवन जीने के लिये एक प्राकृतिक पर्यावरण उपलब्झ कराती है। हमारी प्रकृति हमें कई प्रकार के सुंदर फूल, आकर्षक पक्षी, जानवर, हरे वनस्पति, नीला आकाश, भूमि, समुद्र, जंगल, पहाड़, पठार आदि प्रदान करती है। हमारे स्वस्थ जीवन के लिये ईश्वर ने हमें एक बेहद सुंदर प्रकृति बना कर दी है। जो भी चीजें हम अपने जीवन के लिये इस्तेमाल करते है वो प्रकृति की ही संपत्ति है जिसे हमें सहेज कर रखना चाहिये। ![]() test sample of photos in the form of numerics हमें इसकी वास्तविकता को खत्म नहीं करना चाहिये और साथ ही इसके पारिस्थितिकी तंत्र को असंतुलित नहीं करना चाहिये। हमारी कुदरत हमें जीने और खुश के लिये बहुत सुंदर वातावरण प्रदान करती है इसलिये ये हमारा कर्तव्य है कि हम इसको सुरक्षित और स्वस्थ रखें। आज के आधुनिक समय में, इंसानों की बहुत सी खुदगर्जी और गलत कामों ने प्रकृति को बुरी तरह प्रभावित किया है लेकिन हम सभी को इसकी सुंदरता को बनाये रखना है। ![]() test sample of photos in the form of numerics
हमारे आस-पास सब कुछ प्रकृति है जो बहुत खूबसूरत पर्यावरण से घिरी हुई है। हम हर पल इसे देख सकते है और इसका लुफ्त उठा सकते है। ![]() test sample of photos in the form of numerics हम हर जगह इसमें प्राकृतिक बदलावों को देखते, सुनते, और महसूस करते है। हमें इसका पूरा फायदा उठाते हुये शुद्ध हवा के लिये रोज सुबह की सैर करने के बहाने घर से बाहर जाना चाहिये तथा प्रकृति के सुबह की सुंदरता का आनन्द उठाना चाहिये। हालाँकि सूर्योदय के साथ ये दिन में नारंगी और सूर्यास्त होने के दौरान ये पीले रंग सा हो जाता है। थोड़ा और समय बीतने के साथ ही काली रात का रुप ले लेता है। ![]() test sample of photos in the form of numerics प्रकृति के पास हमारे लिये सब कुछ है लेकिन हमारे पास उसके लिये कुछ नहीं है बल्कि हम उसकी दी गई संपत्ति को अपने निजी स्वार्थों के लिये दिनों-दिन बरबाद कर रहे है। आज के आधुनिक तकनीकी युग में रोज बहुत सारे आविष्कार हो रहे जिसका हमारी पृथ्वी के प्रति फायदे-नुकसान के बारे में नहीं सोचा जा रहा है। धरती पर हमेशा जीवन के अस्तित्व को संभव बनाने के लिये हमारी प्रकृति द्वारा प्रद्त्त संपत्ति के गिरते स्तर को बचाने की जिम्मेदारी हमारी है। अगर हमलोग अपने कुदरत को बचाने के लिये अभी कोई कदम नहीं उठाते है तो ये हमारी आने वाली पीढ़ी के लिये खतरा उत्पन्न कर देगा। ![]() test sample of photos in the form of numerics हमें इसके महत्व और कीमत को समझना चाहिये इसके वास्तविक स्वरुप को बनाये रखने की कोशिश करनी चाहिये।धरती पर जीवन जीने के लिये भगवान से हमें बहुमूल्य और कीमती उपहार के रुप में प्रकृति मिली है। ![]() test sample of photos in the form of numerics दैनिक जीवन के लिये उपलब्ध सभी संसाधनों के द्वारा प्रकृति हमारे जीवन को आसान बना देती है। एक माँ की तरह हमारा लालन-पालन, मदद, और ध्यान देने के लिये हमें अपने प्रकृति का धन्यवाद करना चाहिये। अगर हम सुबह के समय शांति से बगीचे में बैठे तो हम प्रकृति की मीठी आवाज और खूबसूरती का आनन्द ले सकते है। हमारी कुदरत ढ़ेर सारी प्राकृतिक सुंदरता से सुशोभित है जिसका हम किसी भी समय रस ले सकते है। पृथ्वी के पास भौगोलिक सुंदरता है और इसे स्वर्ग या शहरों का बगीचा भी कहा जाता है। लेकिन ये दुख की बात है कि भगवान के द्वारा इंसानों को दिये गये इस सुंदर उपहार में बढ़ती तकनीकी उन्नति और मानव जाति के अज्ञानता की वजह से लगातार ह्रास हो रहा है। प्रकृति हमारी वास्तविक माँ की तरह की होती है जो हमें कभी नुकसान नहीं पहुँचाती बल्कि हमारा पालन-पोषण करती है। सुबह जल्दी प्रकृति के गोद में ठहलने से हम स्वस्थ और मजबूत बनते है साथ ही ये हमें कई सारी घातक बीमारीयों जैसे डायबिटिज, स्थायी हृदय घात, उच्च रक्त चाप, लीवर संबंधी परेशानी, पाचन संबंधी समस्या, संक्रमण, दिमागी समस्याओं आदि से भी दूर रखता है। ये हमारे स्वास्थ्य के लिये अच्छा है कि हम चिड़ियों की मधुर आवाज, मंद हवा की खनखनाहट, ताजी हवा की सनसाहट, बहती नदी की आवाज आदि सुबह - सुबह सुनें। ज्यादातर कवि, लेखक और लोगों को अपने दिमाग, शरीर, और आत्मा को दुबारा से ऊर्जायुक्त बनाने के लिये उद्यानों में योगा और ध्यान करते देखा जा सकता है।
प्रकृति सभी के जीवन का महत्वपूर्ण और अविभाज्य अंग है। खूबसूरत प्रकृति के रुप में भगवान के सच्चे प्यार से हम सभी धन्य है। कुदरत के सुख को कभी गँवाना नहीं चाहिये। कई प्रसिद्ध कवियों, लेखक, पेंटर, और कलाकार के कार्य का सबसे पसंदीदा विषय प्रकृति होती है। प्रकृति भगवान की बनायी सबसे अद्भुत कलाकृति है जो उसने बहुमूल्य उपहार के रुप में प्रदान की है। प्रकृति सब कुछ है जो हमारे आसपास है जैसे पानी, हवा, भूमि, पेड़, जंगल, पहाड़, नदी, सूरज, चाँद, आकाश, समुद्र आदि। कुदरत अनगिनत रंगों से भरी हुई है जिसने अपनी गोद में सजीव-निर्जीव सभी को समाहित किया है। भगवान के द्वारा प्रकृति में सभी को अपनी शक्ति और विशिष्टता उपलब्ध करायी गई है। इसमें इसके कई रुप है जो मौसम दर मौसम और यहाँ तक कि मिनट दर मिनट बदलते रहते है जैसे समुद्र सुबह के समय चमकीला नीला दिखाई देता है लेकिन दोपहर के समय हरित मणी रंग सा दिखाई पड़ता है। आकाश पूरे दिन अपना रंग बदलता रहता है सूर्योदय में पीला गुलाबी, दिन के समय आँखे चौंधियाने वाला नीला रंग, चमकदार नारंगी सूर्यास्त के समय और रात के समय बैंगनी रंग का। हमारा स्वाभाव भी प्रकृति के अनुसार बदलता है जैसे खुश और आशावादी सूरज के चमकने के समय, बरसात के समय और वसंत के समय। हम चाँदनी रोशनी में दिल से खुशी महसूस करते है, तेज धूप में हम ऊबा हुआ और थका महसूस करते है। कुदरत के पास कुछ परिवर्तनकारी शक्तियाँ है जो हमारे स्वाभाव को उसके अनुसार बदलते है। रोगी को अपनी बीमारी से बाहर निकलने के लिये प्रकृति के पास शक्ति है अगर उनको जरुरी और सुहावना पर्यावरण उपलब्ध कराया जाये। हमारे स्वस्थ जीवन के लिये प्रकृति बहुत जरुरी है। इसलिये हमें इसको खुद के लिये और अगली पीढ़ी के लिये संरक्षित रखना चाहिये। हमे पेड़ों और जंगलों को नहीं काटना चाहिये, हमें अपने गलत कार्यों से महासागर, नदी और ओजोन परत को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिये, ग्रीन हाउस गैस को नहीं बढ़ाना चाहिये तथा अपने निजी स्वार्थों के कारण पर्यावरण को क्षति नहीं पहुँचाना चाहिये। हमें अपने प्रकृति के बारे में पूर्णत: जागरुक होना चाहिये और इसको बनाए रखने का प्रयास करना चाहिये जिससे धरती पर जीवन हमेशा संभव हो सके।
प्रकृति एक प्राकृतिक पर्यावरण है जो हमारे आसपास है, हमारा ध्यान देती है और हर पल हमारा पालन-पोषण करती है। ये हमारे चारों तरफ एक सुरक्षात्मक कवच प्रदान करती है जो हमें नुकसान से बचाती है। हवा, पानी, जमीन, आग, आकाश आदि जैसी प्रकृति के बिना हमलोग इस काबिल नहीं है कि धरती पर रह सके। प्रकृति हमारे आस-पास कई रुपों में है जैसे पेड़, जंगल, जमीन, हवा, नदी, बारिश, तालाब, मौसम, वातावरण, पहाड़, पठार, रेगिस्तान आदि। कुदरत का हर स्वरुप बहुत शक्तिशाली है जो हमारा पालन पोषण करने के साथ ही नाश करने की क्षमता भी रखता है। आज के दिनों में सभी के पास प्रकृति का आनन्द उठाने का कम समय है। बढ़ती भीड़ में हम प्रकृति का सुख लेना और अपने को स्वस्थ रखना भूल गये है। हम शरीर को फिट रखने के लिये तकनीक का प्रयोग करने लगे है। जबकि ये बिल्कुल सत्य है कि प्रकृति हमारा ध्यान रख सकती है और हमेशा के लिये फिट रख सकती है। बहुत सारे लेखक अपने लेखन में प्रकृति के फायदे और उसकी सुंदरता का गुणगान कर चुके है। प्रकृति के पास ये क्षमता है कि वो हमारे दिमाग को चिंता मुक्त रखे और बीमारीयों से बचाए। मानव जाति के जीवन में तकनीकी उन्नत्ति के कारण हमारी प्रकृति का लगातार ह्रास हो रहा है जिसे संतुलित और उसके प्राकृतिक संपत्ति को संरक्षित रखने के लिये उच्च स्तर की जागरुकता की जरुरत है। ईश्वर ने सब कुछ बहुत सुंदरता से देखने के लिये बनाया है जिससे हमारा आँखे कभी नहीं थक सकती। लेकिन हम भूल जाते है कि मानव जाति और प्रकृति के बीच के रिश्तों को लेकर हमारी भी कुछ जिम्मेदारी है। सूर्योदय की सुबह के साथ ये कितना सुंदर दृश्य दिखाई देता है, जब चिड़ियों के गाने, नदी, तालाब की आवाज हवा और एक लंबे दिन के दबाव के बाद बगीचे में शाम में दोस्तों के साथ खुशनुमा पल हो। लेकिन हम अपने पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते प्रकृति की खूबसूरती का आनन्द लेना भूल चुके है। कई बार हमारी छुट्टीयों में हम अपना सारा दिन टीवी, न्यूजपेपर, कम्प्यूटर खेलों में खराब कर देते है लेकिन हम भूल जाते है कि दरवाजे के बाहर प्रकृति के गोद में भी बहुत कुछ रोचक है हमारे लिये। बिना जरुरत के हम घर के सारे लाइटों को जलाकर रखते है। हम बेमतलब बिजली का इस्तेमाल करते है जो ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देता है। हमारी दूसरी गतिविधियाँ जैसे पेड़ों और जंगलों की कटाई से CO2 गैस की मात्रा में वृद्धि होती है और ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनती है। अगर हमें हमेशा खुश और स्वस्थ रहना है तो हमें स्वार्थी और गलत कार्यों को रोकने के साथ-साथ अपने ग्रह को बचाना होगा और इस सुंदर प्रक koृति को अपने लिये बेहतर करना होगा। पारिस्थितिकीय तंत्र को संतुलित करने के लिये हमें पेङों और जंगलो की कटाई रोकनी होगी, ऊर्जा और जल का संरक्षण करना होगा आदि। अंत में प्रकृति के असली उपभोक्ता हम है तो हमें ही इसका ध्यान रखना चाहिये। |